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President Donald Trump participates in the Board of Peace Charter Announcement and Signing ceremony during the World Economic Forum, Thursday, January 22, 2026, at the Davos Congress Center in Davos, Switzerland. (Official White House Photo by Daniel Torok)

क्या ‘Board of Peace’ में भारत को शामिल होना चाहिए ?

इस लेख में आप पढ़ेंगे: क्या ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होना चाहिए ? Board of Peace UPSC

गाज़ा में इसराइल और हमास के बीच संघर्षविराम को स्थायी रूप से लागु करने और फ़लस्तीनी क्षेत्र में एक अंतरिम सरकार की निगरानी करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा ‘बोर्ड ऑफ पीस‘ (Board of Peace) की औपचारिक शुरुआत की है, जिसमे भारत को भी शामिल होने का निमंत्रण मिला है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भारत इसे स्वीकार करेगा या नहीं।

भारत को Board of Peace में क्यों शामिल नहीं होना चाहिए ?

भारत को Board of Peace में शामिल क्यों होना चाहिए?

Board of Peace से जुड़े कई सवाल हैं। भारत इसमें जल्दीबाज़ी में शामिल नहीं हो सकता है। किन शर्तों पर सदस्य देश इसके चार्टर से बंधे होंगे? इसकी व्याख्या का अधिकार किसके पास होगा? BOP के कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अमेरिका के डेप्युटी रक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन और वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा हैं। ये सारे अमेरिकी नागरिक हैं या ट्रंप के वफ़ादार माने जाते हैं। इस समय तो यह सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय संस्था की बजाय निजी क्लब जैसा प्रतीत होता है