इस लेख में आप पढ़ेंगे: Water-Soluble Fertilizers – UPSC
चीन द्वारा जल में घुलनशील उर्वरकों (Water-soluble fertilizers) के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध से आयात में भारी गिरावट की आशंका थी, क्योंकि चीन भारत के आयात की आधी आपूर्ति करता था। 2025 में, Water-soluble fertilizers के आयात में चीन की हिस्सेदारी 53% (2024) से घटकर 44% हो गई है। लेकिन हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि आयात में गिरावट नहीं आयी है क्योंकि:
- भारतीय कंपनियों ने अपने आयात के स्त्रोतों में विविधता लाई है: नॉर्वे (62% वृद्धि) और रूस (243.5% वृद्धि) से आयात में भारी वृद्धि के कारण सप्लाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। इनके अलावा, घरेलू कंपनियों ने आपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को और संयुक्त राज्य अमेरिका में वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं का रुख किया है।
- घरेलू कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों जैसे संस्थान जिंक EDTA, बोरोन मिश्रण, नैनो उर्वरक और जिंक-घुलनशील जीवाणुओं जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) से समृद्ध जैव उर्वरकों सहित स्वदेशी विकल्प विकसित कर रहे हैं। इन नवाचारों का उद्देश्य सतत कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देते हुए आयात पर निर्भरता को कम करना है। ICAR के संस्थानों, जिनमें भोपाल स्थित भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Soil Science / IISS), दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Indian Agricultural Research Institute / IARI) और बेंगलुरु स्थित भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Horticultural Research / IIHR) शामिल हैं, ने नैनो-उर्वरक, जैव-उर्वरक और अनुकूलित पोषक तत्व मिश्रण जैसी प्रौद्योगिकियों में अग्रणी भूमिका निभाई है।
- मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं (Soil Test-Based Fertiliser Recommendations) और स्थल-विशिष्ट पोषक तत्व प्रबंधन (Site-Specific Nutrient Management) जैसी सरकारी पहलों से इन प्रगति को बल मिलता है, जो एक व्यापक एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management Strategy) रणनीति की बुनियाद हैं।
विशेष उर्वरक (Specialty Fertilizer)
विशेष उर्वरक उन्नत, अनुकूलित पोषक तत्व उत्पाद हैं जो उच्च दक्षता, सटीक वितरण और पौधों की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये बुनियादी NPK से इस मायने में भिन्न हैं कि ये नियंत्रित रिलीज, जल में घुलनशीलता या विभिन्न विकास चरणों के लिए अनुकूलित मिश्रण प्रदान करते हैं, जिससे अंततः उपज और गुणवत्ता में वृद्धि होती है और पोषक तत्वों के अपवाह जैसे पर्यावरणीय प्रभाव कम होते हैं। ये सटीक कृषि (precision agriculture), उच्च मूल्य वाली फसलों (फल, सब्जियां, फूल) और विशेष कमियों वाली मिट्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें कोटिंग्स, अवरोधक और जैविक योजक जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। विशेष उर्वरक उर्वरक विभाग (department of fertilizers) द्वारा संचालित पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के दायरे से बाहर आते हैं। इसलिए इन पर सब्सिडी नहीं दी जाती है और कंपनियां इन्हें बाजार की गतिशीलता के आधार पर आयात करने के लिए स्वतंत्र हैं।
भारत में विशेष उर्वरक (Specialty Fertilizer) बाजार के 2030 तक लगभग 5-6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 2025-2030 के दौरान लगभग 18% की सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) होगी।
1985 के उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order) के तहत, किसी भी श्रेणी को स्पष्ट रूप से “विशेष उर्वरक” के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। हालांकि, इसमें 100% जल-घुलनशील जटिल उर्वरकों और 100% जल-घुलनशील मिश्रणों के लिए प्रावधान शामिल हैं।
विशेष उर्वरकों के विकास के प्रमुख कारक:
- पोषक तत्व कुशल: कंट्रोल्ड रिलीज़ फर्टिलिसेर जैसे नीम कोटेड फर्टिलाइजर (Neem Coated Fertilizer) का मतलब है यूरिया के दानों पर नीम के तेल की परत चढ़ाना, जिससे नाइट्रोजन धीरे-धीरे निकलती है, फसल को ज्यादा पोषण मिलता है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, यूरिया का कम इस्तेमाल होता है, कीटों से बचाव होता है और पर्यावरण को फायदा होता है. ऐसे उर्वरक नाइट्रोजन के रिसाव से होने वाले नुकसान को कम करके पोषक तत्वों को लंबे समय तक उपलब्ध कराते हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है।
- पर्यावरण के अनुकूल: मिट्टी में मौजूद जीवाणुओं की नाइट्रेट के साथ प्रतिक्रिया को नियंत्रित करके डीनाइट्रिफिकेशन में देरी करते हैं।
- जल संकट: जल में घुलनशील उर्वरकों को ड्रिप सिंचाई तकनीक से लगाया जा सकता है, जिससे पानी का बेहतर उपयोग होता है।
- स्थिरता: जैव-उत्तेजक पदार्थों (bio-stimulants) के उपयोग से पर्यावरण में छोड़े जाने वाले खनिज उर्वरकों की मात्रा कम हो जाती है, जिससे मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण कम होता है।
Water-Soluble Fertilizers
जल में घुलनशील उर्वरक / Water-Soluble Fertilizers वे उर्वरक होते हैं जो पानी में घुल जाते हैं और पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने के लिए ड्रिप सिंचाई और पर्णीय छिड़काव के माध्यम से सीधे पौधे पर डाले जाते हैं। ड्रिप सिंचाई के उपयोग से नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) उत्सर्जन में काफी कमी आती है। पर्णीय छिड़काव, जिसमें तरल उर्वरक मिट्टी के बजाय सीधे पत्तियों पर डाला जाता है, एक लक्षित दृष्टिकोण है क्योंकि पोषक तत्व महत्वपूर्ण विकास चरणों के दौरान पौधे के ऊतकों तक सीधे पहुंचाए जाते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया से पौधे द्वारा अवशोषित पोषक तत्वों की मात्रा सीमित होने के कारण पर्णीय छिड़काव को केवल पूरक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यह मृदा उर्वरता कार्यक्रमों का विकल्प नहीं है।
उदाहरण: पोटेशियम नाइट्रेट, मोनोअमोनियम फॉस्फेट, कैल्शियम नाइट्रेट, एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट), पोटैशियम सल्फेट।
WSF विशेष उर्वरकों की व्यापक श्रेणी का हिस्सा हैं।
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy – NBS)
भारत सरकार की एक योजना है जो किसानों को फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों पर उनके पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक आदि) की मात्रा के आधार पर सब्सिडी देती है, ताकि किसानों को उचित मूल्य पर संतुलित उर्वरक मिलें, मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरे और कृषि उत्पादकता बढ़े। इसमें यूरिया को छोड़कर अन्य सभी P&K उर्वरक शामिल हैं।
- उद्देश्य: किसानों को सस्ती दरों पर ज़रूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराना, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना। शामिल उर्वरक: यूरिया को छोड़कर सभी फॉस्फेटिक (P) और पोटासिक (K) उर्वरक (जैसे DAP, MOP, SSP, NPK) इस योजना के अंतर्गत आते हैं।
- सब्सिडी का निर्धारण: सरकार हर पोषक तत्व (N, P, K, S, जिंक, मोलिब्डेनम) के लिए प्रति किलोग्राम सब्सिडी की दर तय करती है, जो अंतर्राष्ट्रीय कीमतों, विनिमय दरों और देश में स्टॉक को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
- फायदे:किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल उपज में सुधार होता है। सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होता है (क्योंकि यह संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करती है)।
- चुनौतियां: उर्वरक उपयोग में असंतुलन: भारत का वास्तविक NPK अनुपात (9.8:3.7:1) अनुशंसित 4:2:1 अनुपात से काफी विचलित है, जिससे पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी का क्षरण हो रहा है।
Sources:


